एक समाज की प्रगति उस समय शुरू होती है जब उसकी बेटियाँ कलम उठाती हैं।
श्री आज़ाद सिंह मेमोरियल फाउंडेशन में हमारा विश्वास है कि महिलाओं की शिक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। यह न केवल व्यक्तिगत सशक्तिकरण का मार्ग है, बल्कि सामाजिक बदलाव का सबसे प्रभावशाली हथियार भी है।
क्यों ज़रूरी है महिलाओं की शिक्षा?
एक शिक्षित महिला सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि अपने पूरे परिवार और समुदाय के लिए बदलाव की प्रेरणा बनती है। वह बेहतर स्वास्थ्य निर्णय लेती है, अपने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता देती है और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती है।
अनुसंधान से स्पष्ट है कि जब एक लड़की पढ़ती है, तो बाल मृत्यु दर घटती है, पोषण स्तर सुधरता है और अगली पीढ़ी के बच्चों की स्कूलों में भागीदारी बढ़ती है।
ज़मीनी सच्चाई , जिनसे हम रोज़ रूबरू होते हैं
हमारे कार्यक्षेत्रों में कई बार ऐसी प्रतिभाशाली लड़कियाँ मिलती हैं, जिनके सपने डॉक्टर, इंजीनियर या शिक्षक बनने के होते हैं। लेकिन आर्थिक कठिनाइयों, पारिवारिक जिम्मेदारियों या सामाजिक बंदिशों के कारण उनकी पढ़ाई बीच में रुक जाती है।
इन्हीं लड़कियों के लिए हमारा प्रयास शुरू होता है।
हम फाउंडेशन के माध्यम से छात्रवृत्ति, पुस्तकें, डिजिटल लर्निंग सामग्री और मेंटरशिप जैसी सहायता उपलब्ध कराते हैं। इसके साथ ही हम अभिभावकों और समुदायों को भी जागरूक करते हैं कि बेटी की शिक्षा बोझ नहीं, भविष्य का निर्माण है।
महिला शिक्षा – दान नहीं, निवेश है
जब आप एक महिला को शिक्षित करते हैं, तो आप सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी को अवसर देते हैं। महिलाएँ अपनी कमाई का 90% हिस्सा अपने परिवार और समाज पर खर्च करती हैं। ये आँकड़े दिखाते हैं कि महिला शिक्षा सिर्फ ‘सामाजिक कार्य’ नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति का मूल स्तंभ है।
आगे की राह
हमारा सपना है – हर लड़की को शिक्षा का अधिकार, हर महिला को सम्मान।
हम ऐसे सुरक्षित और प्रोत्साहक शैक्षिक माहौल बनाना चाहते हैं, जहाँ लड़कियाँ न सिर्फ सपने देखें, बल्कि उन्हें सच भी कर सकें।
पर यह काम सिर्फ हमारे फाउंडेशन का नहीं है – इसमें समाज के हर व्यक्ति की भूमिका है।
अगर आप यह लेख पढ़ रहे हैं, तो मैं आपसे आग्रह करती हूँ – आगे आइए, जुड़िए, और किसी एक लड़की की शिक्षा में योगदान दीजिए। चाहे वॉलंटियर बनकर, आर्थिक सहयोग देकर, या सिर्फ अपने घर में बेटियों को आगे बढ़ाकर।
क्योंकि जब एक लड़की पढ़ती है, तब पूरा देश आगे बढ़ता है।
पूजा, निदेशक, श्री आज़ाद सिंह मेमोरियल फाउंडेशन